वास्तु

वास्तु के अनुसार कैसे हो आपका भूमि का ढाल और कहाँ क्या रखें

Written by hindicharcha

हिंदी चर्चा के वास्तु ज्ञान में आज हम आपको बताएँगे की अगर आप भी घर का वास्तु दोष मिटाना चाहते है तो वास्तु के अनुसार कैसे हो आपका भूमि का ढाल और कहाँ क्या रखें।

केसा हो भूमि का ढाल : सूरज हमारी ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है अत:हमारे वास्तु का निर्माण सूरज की परिक्रमा को ध्यान में रखकर होगा तो अत्यंत उपयुक्त रहेगा। सूर्य के बादचंद्र का असर इस धरती पर होता है तो सूर्य और चंद्र की परिक्रमा के अनुसार ही धरती का मौसम संचालित होता है। उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव धरती के दो केंद्र बिंदु हैं।उत्तरी ध्रुव जहां बर्फ से पूरी तरह ढंका हुआ एक सागर है, जो आर्कटिक सागर कहलाता है वहीं दक्षिणी ध्रुव ठोसधरती वाला ऐसा क्षेत्र है, जो अंटार्कटिका महाद्वीप के नाम से जाना जाता है। ये ध्रुव वर्ष-प्रतिवर्ष घूमते रहते हैं। दक्षिणी ध्रुव उत्तरी ध्रुव से कहीं ज्यादा ठंडा है। यहां मानवों की बस्ती नहीं है। इन ध्रुवों के कारण ही धरती का वातावरण संचालित होता है।उत्तर से दक्षिण की ओर ऊर्जा का खिंचाव होता है। शाम ढलते ही पक्षी उत्तर से दक्षिण की ओर जाते हुए दिखाई देते हैं। अत: पूर्व, उत्तर एवं ईशान की और जमीन का ढालहोना चाहिए। प्रत्येक दिशा नियम से बंधी है अत: प्रत्येक दिशा में क्या होना चाहिए, यह जानना जरूरी है।

उत्तर दिशा : इस दिशा में घर के सबसे ज्यादा खिड़की और दरवाजे होना चाहिए। घर की बालकनी व वॉश बेसिन भी इसी दिशा में होनाचाहिए। यदि घर का द्वार इस दिशा में है और अति उत्तम।

दक्षिण दिशा : दक्षिण दिशा में किसी भी प्रकार का खुलापन, शौचालय आदि नहीं होना चाहिए। घर में इस स्थान पर भारी सामान रखें। यदि इस दिशा में द्वार या खिड़की है तो घर में नकारात्मक ऊर्जा रहेगी और ऑक्सीजन का लेवल भी कम हो जाएग। इससे गृह कलह बढ़ेगी।

पूर्व दिशा: पूर्व दिशा सूर्योदय की दिशा है। इस दिशा से सकारात्मक व ऊर्जावान किरणें हमारे घर में प्रवेश करती हैं। यदि घर का द्वार इस दिशा में है तो मात्र उत्तम। खिड़की रख सकते हैं।

पश्चिम दिशा : आपका रसोईघर या टॉयलेट इस दिशा में होना चाहिए। रसोईघर और टॉयलेट पास- पास न हो, इसका भी ध्यान रखें।

उत्तर-पूर्व दिशा : इसे ईशान दिशा भी कहते हैं। यह दिशा जल कास्थान है। इस दिशा में बोरिंग, स्वीमिंग पूल, पूजास्थलआदि होना चाहिए। यदि इस दिशा में घर का द्वार है तो सोने पर सुहागा।

उत्तर-पश्चिम दिशा : इसे वायव्य दिशा भी कहते हैं। इस दिशा में आपका बेडरूम, गैरेज, गौशाला आदि होना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व दिशा : इसे घर का आग्नेयकोण कहते हैं। यह अग्नि तत्व की दिशा है। इस दिशा में गैस, बॉयलर, ट्रांसफॉर्मर आदि होना चाहिए।

दक्षिण-पश्चिम दिशा : इस दिशा को नैऋत्य दिशा कहते हैं। इस दिशा में खुलापन अर्थात खिड़की, दरवाजे बिलकुल ही नहीं होना चाहिए। घर के मुखिया का कमरा यहां बना सकते हैं। कैश काउंटर, मशीनें आदि आप इस दिशा में रख सकते हैं।

हम आशा करते है आपको यह जानकारी पसंद आई होगी, अगर आपको इसमें कोई त्रुटी लगे तो कृपया हमें कमेंट्स के माध्यम से बताएँ ताकि हम इसमें सुधार कर सकें. धन्यवाद.

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